10 मंडल · 1,028 सूक्त · 10,552 मंत्र · रचना लगभग 1500–3000 ईसा पूर्व
ऋग्वेद क्या है?
ऋग्वेद दो शब्दों से बना है — ऋक् और वेद। ऋक् का अर्थ है — स्तुति, प्रशंसा, या वो कविता जो किसी सत्य को प्रकट करे। और वेद का अर्थ है — ज्ञान। वो ज्ञान जो सुना गया हो, अनुभव किया गया हो। इसीलिए वेदों को श्रुति भी कहते हैं — यानी जो सुना गया।
वेद चार हैं — ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद। इनमें सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण है — ऋग्वेद। बाकी तीनों वेद किसी न किसी रूप में ऋग्वेद पर ही आधारित हैं। ऋग्वेद में हैं — 10 मंडल, 1,028 सूक्त और 10,552 मंत्र। हर मंत्र संस्कृत में है, हर मंत्र का एक ख़ास छंद है, एक ख़ास लय है।
ज़्यादातर Western scholars मानते हैं — ऋग्वेद की रचना लगभग 1500 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व के बीच हुई। लेकिन भारतीय परंपरा और कुछ खगोलीय calculations के आधार पर विद्वान इसे 3000 ईसा पूर्व तक पुराना मानते हैं — यानी जब Egypt में पिरामिड बन रहे थे, तब भारत में ऋग्वेद के मंत्र गूँज रहे थे।